Headline • 4 फरवरी को थी बेटी की शादी, शनिवार को घर आना था जवान को, लेकिन शाम तिरंगे में लिपटी लाश पहुंचेगी• कैदियों में सुधार लाने की अच्छी पहल, उरई जेल ने किया ओलंपियाड का आयोजन• अब हाईकोर्ट से AAP को लगा झटका, तिलमिलाई पार्टी बोली, मोदी का कर्ज चुका रहे हैं CEC ज्योति• कोर्ट मैरिज करने पहुंचे प्रेमी जोड़े ने किया हाईवोल्टेज ड्रामा• डोकलाम में निर्माण गतिविधियों की चीन ने की पुष्टि, कहा, उसके अधिकार क्षेत्र में आता है यह इलाका• पोर्न स्टार का दावा, डोनाल्ड ट्रंप के साथ उसके थे सेक्स संबंध, राष्ट्रपति के सचिव ने दिया पैसा• कंफ्यूज्ड विराटः किसे चुने यहां तो सभी फ्लाॅप, तीसरे टेस्ट में एक नहीं चार की हो सकती है छुट्टी• गाजीपुर में रखी गई पूर्वांचल के पहले लाॅजिस्टिक पार्क की नींव, 2 लाख टन भंडारन की क्षमता• कृषि मंत्री का सपा पर बड़ा वार, कहा, चोरों की तरह सड़क पर आलू फेंक गए• पद्मावत विवाद : ओवैसी ने मुसलमानों से कहा- 'फिल्म देखकर वक्त और पैसे बर्बाद न करें'• केजरीवाल सरकार को तगड़ा झटका, चुनाव आयोग ने दिया 20 विधायकों को अयोग्य करार• प्रेग्नेंट हैं न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंदा आर्डर्न, जल्द लेंगी छह सप्‍ताह की छुट्टी• जंगली जानवरों के लिए बिछाए गए जाल में फंसा तेंदुआ, पीलीभीत रेस्क्यू टीम का हो रहा है इंतजार• घायलों ने तड़प-तड़पकर तोड़ा दम,पुलिस अस्पताल ले जाने की बजाय कहती रही-'गाड़ी गंदी हो जाएगी'• जिला अस्पताल से बाबा साहेब का नाम हटाया तो दलित समाज के लोगों ने बोर्ड पर पोत दिया काला पेंट• गाजियाबाद : रेल की पटरी काट रहा था युवक, लोगों ने पीट पीटकर कर दी ऐसी हालत, देखें तस्वीरें• सुप्रीम कोर्ट ने 'पद्मावत' फिल्म का विरोध करने वालों को दिया बड़ा झटका, कहा...• मुजफ्फरनगर दंगों के मामले में पूर्व मंत्री संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक कोर्ट में पेश• लखनऊ : देर रात घर में घुसे डकैत, विरोध करने पर तीन को मारी गोली,2 नाबालिग लड़कियों का किया अपहरण• Blue Whale गेम खेलती थी ऋतिक को चाकू मारने वाली छात्रा,दो बार घर से भी...• 24 घंटे में पाकिस्तान ने फिर तोड़ा सीजफायर, दो लोगों की मौत, 7 घायल• दरोगा ने की थी महिला सिपाही से छेड़छाड़, 14 महीने बाद दर्ज हुआ मुकदमा• हरियाणवी सिंगर ममता शर्मा की निर्मम हत्‍या, खेत में मिला शव• इलाहाबाद पहुंचे सीएम योगी, संत सम्मेलन में लेंगे हिस्सा• मानवता शर्मसार : गैंगरेप पीड़िता का इलाज नहीं कर रहे डॉक्टर, बिस्तर पर पड़ी तड़प रही है महिला

दिक्कत से दिक्कत या दिक्कत सियासी है !

नोटबंदी से फिलहाल दिक्कत आम को भी और खास को भी दिक्कत तो है । और सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है सड़क से संसद तक नोटबंदी पर सवाल उठा रही पॉलिटिकल पार्टियों को । जो विरोध के लिए हवाला दे रहीं हैं लोगों को हो रहीं दिक्कतों का । तो क्या दिक्कत से दिक्कत है या दिक्कत की वजह कुछ और है ? ये समझने की जरुरत है । असल में आम लोगों की दिक्कतों का हवाला देकर विरोध करने वाली पॉलिटिकल पार्टी ये बताएं कि आम लोग क्या आज दिक्कत में हैं ? आम और गरीब क्या आज लाइन में लगे हैं ? राशन से लेकर अस्पताल, अस्पताल से लेकर सरकारी कार्यालय तक कभी देखा है बदहाल व्यवस्था से जूझते गरीब को ? यहां तक कि पूरे दिन मेहनत-मजदूरी करने वाले मजदूर को तो उसकी मजदूरी भी लाइन में ही लगकर मिलती है । जिसकी ये गैरंटी भी नहीं कि मिलेगी भी कि नहीं । ना जाने कितने लोग सरकारी अस्पताल में बिना इलाज के दम तोड़ देते हैं । कभी देखा है जब गरीब को रिश्वत ना देने पर सरकारी अस्पताल से धक्के मारकर निकाल दिया जाता है । तो वहीं निजी अस्पताल बिना पैसे दिए इलाज करने से इंकार कर देते हैं । कई तो इसलिए जान गंवा देते हैं क्योंकि अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं है । कभी देखा है किसी पीड़ित को जो थाने के चक्कर काट-काटकर थक जाता है मगर बिना पैसे दिए इंसाफ तो दूर पुलिस सुनती भी नहीं औऱ वो इसलिए आत्महत्या कर लेता है । कभी गौर किया है जब एक गरीब की बेटी दहेज ना देने पर जला दी जाती है । देश में ना कितने ही गरीब बिन पैसे भूखे पेट सो जाते हैं । क्या कभी उनका दर्द समझने की कोशिश की किसी ने ? कभी सोचा है उन युवाओं के बारे में जो पढ़-लिखकर भी बेरोजगार है । नौकरी नहीं तो पैसे कहां से ? नौकरी के लिए भी तो रिश्वत ही चलती है । बिन मुआवजे के किसान आत्महत्या कर लेता है । बिन पैसे सब सून । फिर दिक्कत आज ही क्यों ? ये सोचने का विषय है कि विरोध की असल वजह है क्या ?  यूपी सरकार ने एलान किया कि कुछ दिन के लिए पुराने नोट रजिस्ट्री में स्वीकार्य होंगे । अब सोचिए क्या गरीब आदमी प्रोपर्टी खरीदेगा ? पहले वो पेट तो भर ले । प्रोपर्टी लेने-बेचने की उसकी हैसियत होती तो वो गरीब नहीं होता । तो सोचिए ये फैसला किनके लिए ? हां अगर राहत देनी ही है तो कुछ ऐसा कीजिए सरकार कि गरीब अपने पुराने नोट भी चला लें और अपना काम धंधा छोड़कर लम्बी लाइनों में भी ना लगना पड़े । यूपी के ही आजमगढ़ में कुछ बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़कर खुले पैसे के जरिए लोगों की मदद के लिए सरकारी अस्पताल में स्टॉल लगाए और काफी लोगों की मदद भी की । कुछ ऐसा ही कर देते । और कुछ नहीं तो सख्त निर्देश अस्पतालों को ही दे दिए जाते कि नोटबंदी की वजह से किसी का इलाज ना रुके । तो क्या ये अस्पताल इलाज के लिए इंकार कर देते ? जहां पुराने नोटों की स्वीकार्यता के सख्त आदेश हैं कम से कम वहां तो ये नोट स्वाकार्य हों  ये प्रतिबद्धता ही दिखा देते । तो क्या जनता यूं परेशान होती ! ये सवाल उन सभी राजनीतिक दलों से । जिनकी कहीं ना कहीं राज्य में अपनी सरकार है । क्या विरोध करने भर से जिम्मेदारी पूरी हो जाती है ? वाकई चिंता है तो सवाल के बजाए समाधान ढूंढिए । माना फैसला केंद्र सरकार का है मगर प्रदेश में तो सरकार आप भी हैं । जनता के प्रति जिम्मेदारी तो आपकी भी है । जनादेश तो आपको भी मिला । फिर कोशिश आपकी की तरफ से क्यों नहीं ? इसलिए ये सवाल कि दिक्कत के लिए दिक्कत है या दिक्कत सियासी है ? 

संबंधित समाचार

फ़टाफ़ट खबरे

 

live-tv-uttrakhand

live-tv-rajasthan

ब्लॉग

लीडर

  • उमेश कुमार

    एडिटर-इन-चीफ,समाचार प्लस

    उमेश कुमार समाचार प्लस के एडिटर इन चीफ हैं।

  • प्रवीण साहनी

    एक्जक्यूटिव एडिटर

    प्रवीण साहनी पत्रकारिता जगत का जाना-माना नाम और चेहर...

आपका शहर आपकी खबर

वीडियो

हमारे एंकर्स

शो

:
:
: