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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आजमगढ़ संसदीय सीट से चुनावी दंगल में ताल ठोंकने की कयास के बीच आजमगढ़ में भी आपसी खींंचतान तेज़ हो गयी है। वर्तमान में इस सीट से मुलायम सिंह यादव सांसद हैं, लेकिन वो इस बार आजमगढ़ की जगह मैनपुरी से लड़ने की बात कह चुके हैं। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान हो चुका है। दोनों पार्टियों में सीट को लेकर भी सहमति बन गई है।

सपा के गढ़ आजमगढ़ से पूरे पूर्वांचल में परचम लहराने की तैयारी की चर्चा है। इन खबरों के बीच यहाँ समाजवादी पार्टी में अखिलेश के लड़ने का स्वागत किया जा रहा है वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी ही नहीं जन-जन के द्वारा स्वागत किया जाएगा। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव के अनुसार अखिलेश के डर से मोदी भी वाराणसी से भाग जायेंगे। जबकि दूसरी तरफ आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के बाहुबली व कद्दावर नेता रमाकांत यादव अभी अपना पत्ता खोलने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि रमाकांत ने ही 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह को कड़ी टक्कर दी थी और बमुश्किल मुलायम जीत पाए थे जिसकी कसक बाद में भी उनके मन में रही थी। जबकि रमाकांत पहले सपा से फिर बसपा से फिर बीजेपी से लोकसभा पहुँच चुके थे। रमाकांत का यादव बहुल आजमगढ़ में अपनी बिरादरी में गहरी पैठ है। लेकिन 2014 हारने के बाद भी और योगी के सीएम के बनने पर रमाकांत ने राजनाथ सिंह व योगी आदित्यनाथ को कई मुद्दों को लेकर बुरा भला कहा था। जिसका पार्टी में उनकी छवि पर उलटा असर हुआ माना जा रहा है। इसलिए रमाकांत अखिलेश के यहाँ से चुनाव लड़ने की चर्चा पर नपातुला जवाब ही दे रहे हैं कि लोकतंत्र में कोई कहीं से भी लड़ सकता है। रमाकांत यादव ने चुनावी मैदान में लड़ने को लेकर इस बार चुनाव लड़ने का बहुत इरादा नहीं बताया। वह राजनीति को लेकर पिछड़ों दलितों के बीच में जाकर उनकी हक की लड़ाई लड़ेंगे।

आजमगढ़ सपा का गढ़ कहे जाने वाला जहां सपा-बसपा गठबंधन के बाद सपा के लिए सीट और भी सुरक्षित मानी जा रही है। हालांकि अखिलेश यादव ने अपनी तरफ से आजमगढ़ सीट से चुनाव लड़ने को लेकर कोई इशारा नहीं किया है। अखिलेश की उम्मीदवारी को लेकर मंथन किया जा रहा है। ऐसे में पूर्वांचल के राजनीतिक सियासी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी से और अखिलेश यादव की आजमगढ़ से चुनाव मैदान में उतरेंगे तो मुकाबला दिलचस्प होगा।

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