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यूपी. गाजियाबाद पुलिस का बेहद खौफनाक चेहरा सामने आया है। पुलिस ने एक युवक के परिजनों को बिना सूचना दिए। उसके शव को लावारिस में फूंक दिया। इससे गुस्साएं परिजनों ने साहिबाबाद थाने में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की इस लापरवाही की वजह से वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं करा पाए। परिजनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड  नहीं किया गया तो वे दोबारा थाने में धरने पर बैठ जाएंगे। 

 

नशे में था तो थाने ले आई पुलिस

-ये मामला गाजियाबाद के श्याम पार्क एक्सटेंशन का है। 

मृतक मनदीप के पिता गिरीश सिंह नेगी ने बताया कि उनके बेटे को पुलिस ने लावारिस समझकर फूंक दिया। इस बात की जानकारी उन्हें शनिवार को हुई। इसके बाद वह तुरंत थाने पहुंचे। मगर पुलिस मदद करने की बजाय उन्हें डराने धमकाने लगी। 

-थाने में बैठे पुलिस वालों ने उन्हें गुमराह करना शुरू कर दिया। पुलिस ने कहा कि उनके बेटे को नशे की हालत में शनि चौक पुलिस की PCR लेकर आई थी।

- श्याम पार्क एक्सटेंशन की PCR पर तैनात पुलिस कर्मियों ने बताया कि 100 नंबर की सूचना पर वह मनदीप को थाने लाए थे। उसने थाने पर अपना नाम व पता बताया था। उसे छोड़कर वह चले गए थे।

 

परिजनों को नहीं दी गई कोई सूचना और कर दिया अंतिम संस्कार 

- गिरीश ने कहा कि मनदीप के नाम बताने के बावजूद पुलिस ने उसे लावारिस में क्यों भर्ती कराया। उसकी मौत होने पर उन्हें सूचना क्यों नहीं दी। 

-लावारिस में अंतिम संस्कार करने से पहले अखबार या अन्य माध्यम से सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की। पुलिस की वेबसाइट पर सूचना अपलोड क्यों नहीं की। 

-उनकी गुमशुदगी दर्ज होने के 24 घंटे बाद लावारिस में अंतिम संस्कार किया गया, तो उनसे शिनाख्त क्यों नहीं कराया गया। 

-गुमशुदगी दर्ज होने के बाद उनके बेटे का विवरण अन्य थाने - चौकी व अन्य जगह क्यों प्रसारित नहीं की गई। 

-इससे साफ है कि पुलिस ने बेटे के साथ मारपीट की, जिससे उससे गंभीर से चोट आई और उसकी मौत हो गई।

 

ऐसे समझे पूरा मामला 

- 9 जुलाई की रात 10 बजे मनदीप घर से लापता हुआ।

- 9 जुलाई की रात करीब 12 बजे पुलिस ने लावारिस में एमएमजी अस्पताल, गाजियाबाद में भर्ती कराया।

- 10 जुलाई की सुबह करीब सवा 7 बजे अस्पताल में मौत हो गई।

- 11 जुलाई को परिजन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे, नहीं दर्ज हुई।

- 12 जुलाई को पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की।

- 13 जुलाई को पुलिस ने लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया।

- 15 जुलाई को पुलिस ने परिजनों से शिनाख्त कराई।

- 16 जुलाई को परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

 

ये उठ रहे है पुलिस पर सवाल 

- थाने लाने पर मनदीप का क्यों नहीं किया शिनाख्त, जबकि वह होश में था।

- लावारिस में मौत होने पर उसकी फोटो व विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं।

- गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचने पर परिजनों से उसकी शिनाख्त क्यों नहीं कराई गई।

- पुलिस ने थाने पहुंचने पर परिजनों को गुमराह करने का क्यों प्रयास किया। 

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