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बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक्यूट इनसेफ़िलाइटिस सिंड्रोम से मरने वाले बच्चों कि संख्या लगातार बढ़ रही है। बुधवार की सुबह ही कुछ बच्चों की मौत के साथ अब आकड़ा 140 के पार पहुच गया है, अभी ऐसे वहां बहुत बच्चें है जो ICU में भर्ती है। उनकी हालत बड़ी ही नाजुक हैं। अभी तक किसी के पास इस बिमारी का सही कारण नहीं पता है। राज्य सरकार और स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों की माने तो इसका असली कारण लीची है, लेकिन सब इस बात से सहमत नहीं है।

लीची के बीज में मेथाईलीन प्रोपाइड ग्लाईसीन (एमसीपीजी) की सम्भावित मौजूदगी को पहले से ही कम ग्लूकोस स्तर वाले कुपोषित बच्चों को मौत के कगार पर ला खड़ा करने के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है। विशेषज्ञ की माने तो लीची को जिम्मेदार मानना गलत होगा क्योकि लीची में बहुत मात्रा में विटामिन पाया जाता है। लीची में तीन भाग की होती है पहली छिलका, दूसरा पल्प और अन्तिम बीज लेकिन अभी तक कोई प्रमाणित शोध सामने नहीं आया की पल्प में भी मेथाईलीन प्रोपाइड ग्लाईसीन की कितनी मात्रा है इसलिए यह कहना पूरी गलत होगा कि लीची ही जिम्मेदार है।

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