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बुलंदशहरः यहां देश के सबसे विशालतम शिवलिंगों में एक शिवलिंग है। इस शिवालय की ऊंचाई 70 फिट है। शिवभक्त शिवालय को द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ के नाम से जानते हैं।

इस शिवालय की विशेषता यह है कि यहां 12 ज्योतिर्लिंगों से स्पर्श कराकर लाये गए 12 ज्योतिर्लिंगो की स्थापना की गई है ताकि शिवभक्तों को एक ही जगह सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन का लाभ मिल सके। देश के मुख्य मुख्य तीर्थ स्थलों, नदियों, समुद्रों से जल व मिट्टी लाकर इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई है।

इस सिद्ध महापीठ का निर्माण विश्व ज्योतिष आचार्य मनजीत धर्मध्वज जी ने शिवप्रेरणा से कराया है। आचार्य मनजीतजी की मानें तो वो बचपन से ही हनुमान जी के भक्त रहे हैं और पिछले 25 वर्षों से साल से के नवरात्रों में मौन होकर गर्भ साधना करते आ रहे है।

साल 2009 में आचार्य जी को नवरात्रों में गर्भ साधना के दौरान स्वयं भगवान शंकर ने खुली आँखों से दर्शन दिए थे। स्वयं शिव दर्शन के बाद आचार्य जी ने शिव प्रेरणा से मैथनी ज्योतिष के अनुसार राष्ट्र हित के लिए 2009 में ही अक्षय तृतीया को इस शिवालय सिद्ध महापीठ की नींव रखी थी।

2009 से महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ का निर्माण कार्य शुरू होकर अप्रैल 2018 में अक्षय तृतीया को सिद्ध महापीठ में बारह ज्योतिर्लिंगों के साथ महालिंगेश्वर भगवान, मां पार्वती, भगवान कार्तिकेय एवं गणेश की साथ कालभैरव और वीरभद्र भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की गई है।

भगवान महालिंगेश्वर की प्रसिद्धि दूर दूर तक शिवभक्तों में फैल चुकी है। प्रतिदिन असंख्य श्रद्धालु द्वादश महालिंगेश्वर सिध्महापीठ पर दर्शन करने आते है। प्रत्येक सोमवार के दिन महालिंगेश्वर भगवान का विभिन्न प्रकार से श्रृंगार किया जाता है।

सिध्महापीठ पर राष्ट्रहित के लिए विशेष तिथियों में अनुष्ठान और महाभिषेक किये जाते है। सर्पदोष की विशेष पूजा सिध्महापीठ पर रुद्राष्टाध्यायी के साथ महालिंगेश्वर का जलाभिषेक कराकर की जाती है।

 

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