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केरल ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ 28 सितंबर, 2018 के फैसले की याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ में जस्टिस आर एफ नरीमन, ए एम खानविलकर, डी वाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा ​​भी शामिल हैं। मूल रूप से याचिकाओं पर 22 जनवरी को सुनवाई होनी थी। लेकिन न्यायमूर्ति मल्होत्रा ​​मेडिकल अवकाश पर होने से सुनवाई नहीं हो सकी थी।

पिछले साल 28 सितंबर को शीर्ष अदालत के फैसले ने पूरे केरल में विरोध की लहर पैदा कर दी थी, और चार दर्जन से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं। इस बीच सबरीमाला मंदिर के प्रमुख पुजारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाई की याचिका दायर की गई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कुछ महिलाओं द्वारा मंदिर का दौरा करने के बाद परिसर की सफाई करने का आदेश दिया था। सोमवार को केरल सरकार ने माना कि शीर्ष अदालत के फैसले के बाद 10 और 50 वर्ष की आयु के बीच की सिर्फ दो महिलाओं ने धर्मस्थल में प्रवेश किया है।

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